अभी 15 दिन गाँव रहकर आया , बहुत सारी बातें बदल गयी है ! वहां भी अब मोबाइल और केबल कनेक्शन आ
गया है . लोग इन्टरनेट ,एटीएम और फेसबुक की बातें करने लगें हैं। लेकिन कुछ बातें वैसी की वैसी ही है !
भोज भी उनमे से एक है , किसी की जीते जी खाना न मिला हो लेकिन मरने के बाद भोज बहुत भव्य
होना चहिये .
भोज से याद आया , भोज होता है हमारे इलाका मे , जितना बड़ा आदमी उतना बड़ा भोज .
जमीन भले बीक जाये लेकिन भोज तो छागामिया और बारह्गामिया बनता है आखिर फलां बाबू गुजरे हैं .
भोज खाने हम पैदल जाते थे , आज शायद सिर्फ बूढ़े और गरीब ही जाते हैं।लोगों के पास बहुत सारे साधन हो गए हैं।
पैदल जाना लो क्लास हो गया है , लेकिन तो भोज का पैदल जाने मे ही है। लोगों का होजूम 4 बजे से तैयार , आखिर कोस भर जाना है , सूरज ढलते ढलते सारे लोग पहुच गए और फिर नीचे पातीं लगाकर उस जगह जहाँ कल तक कुछ नहीं , हजारो लोग खाते हैं, खाने में सभी आइटम अच्छा हो ,मगर दही सबसे उत्तम होना चाहिए .जो जितना और अच्छा दही देगा
उसका भोज उतना हिट ! अगर रासगूला है तो फिर क्या कहना .
गाँव वाला भोज मैं जाने का टेंशन नहीं , मगर देर बहुत होती थी , पहले बहार वाले खायेंगे फिर हम , कुछ लोग तो सो लेते थे एक नींद . उतर वाड़ी टोल वाला बहुते देरी से बीजो करता है . बीजो एक टर्म हैं जो खाने से पहले बुलाया जाता है
बीजो के इंतजार मैं और जयादा भूख लगता है .
टोल वाला भोज तो बस पूछो मत , इतनी मेहनत करना पड़ता है की कहने का होश नहीं रहता है . बिना caterer और वेटर के हज़ारों लोगों खिलाना गाँव के लोगों का ही तो फ़र्ज़ है .पांच दिन पहले से सारे गाँव से दूध लाना उसका दही बनाना , जलावन के लिए लकड़ी काटना गाँव के युवा ही करेंगे , हाँ अब ये बातें कम हो गयी है सारा दूध सेण्टर से आ जाता है और गैस आ गया है जलावन की जगह लेकिन मेहनत अभी भी है बहुत
भोज का निमंत्रण भी कई तरह का है
सबजना मतलब सारे लोग महिलाओं सहित , हाँ महिलाओं का पारस आता है (सारे आइटम्स घर वाले ले आते हैं )
पुरखोधा मतलब सिर्फ घर के मर्द और बच्चे , महिलाये वर्जित
एकजना मतलब सिर्फ एक आदमी हर चूल्हे पीछे , हाँ एक लोटा ढोने वाला बालक जा सकता है
अब बातें दिनों की , जेनरली सराध का भोज तीन दिन का होता है
एकादसा मतलब मरने के 11दिन बाद , इसमे शिध अन्न खातें हैं , माने आग पे पका हुयी ,भात दाल दही .
दोअद्सा 12 दिन बाद , अशिध अन्न जैसे की चूड़ा दही और चीनी .
तर्योद्षा 13 दिन , मैथिल मैं ये दिन नॉन वेज का होता है , मतलब मांश या मांछ . हाँ मुर्गी और अंड्डा वर्जित है और अशुद्ध भी
बहुत सारी बातें हैं , यहाँ सामना आसां नहीं है , मिलने पे बताऊँगा :)


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