बात सन 1987 की है , भाई उससे पहले की बातें नहीं हमें . हमरा स्कूल हूआ करता था करियन मध्य विद्यालय , मैं शायद स्कूल जाना शुरू किया था , सारी तैयारी थी अपने तरफ से , अ आ से य , र , ल व् और दूंका से बीस तरीक का खांत रता हुआ था . मरसेब को कोई गुन्जईयेस नहीं थी .
सुबह हुआ , ज्यादा समय तो कुआ पे नहाया , कुएं का ठन्डे पानी का कोई सनी नहीं ,कभी पोखरी मे भी नहाते थे दादी के संग घंटो . पता नहीं कब हेलना-तैरना सीख गए थे। अब तालाब का गन्दा पानी देखता हूँ तो यकीन नहीं होता है कि कभी हम यहाँ घंटो रहते थे बिना बीमार हुए ,ननिगावं में नदी जाते थे नानी के संग ,रास्ते में परवल के खेत और बालू ही बालू ,साफ़ होने के बदले और गंदे हो के लौटते थे घर ,
बातें हो रही थी स्कूल कि , स्कूल जाने की तैयारी , बोरा प्लास्टिक वाला खाद वाला ,,,,,सेमेंट वाला छोटा था , अटते नहीं दू गोटा . पांचवां क्लास से मिलता था बेंच डेस्क उससे पहले तक बच्चा क्लास बोरा वाला ,,,, सेलेट और पेंसिल झोरा में रखा और चलो जल्दी नहीं तो पार्थना छूट जायेगा और मार लगेगी सो अलग से . चप्पल भुला जाता था स्कूल में ........ तो ले जाना ही छोर दिया .
स्कूल का भी सीधा नियम था , पार्थना और फिर बैठ जाओ , झोरा खोलो , सेलेट निकालो और जो आता है सब लिख के मरसेब को दिखा आओ मरसेब कभी कभी ही गलती पकरते थे . गलती होने पे आती थी बुझावन सिंह की बारी (मरसेब की छड़ी )
5 मिनट माने पेशाब करने जाना , और १० मिनट माने २ नंबर इतना हमें पता चल गया था .वैसे १० मिनट मांगकर जाते थे इमली तोरने उतरबारी टोल और फिर पेंसिल के बदले मैं इमली , हां कभी कभी छिना जाता था , किसी के कोम्प्लैन पर .
टिफिन में घर जा के खाना और फेर दोसरा बेरियाँ , यहाँ तो मजा आता था , एक ही घंटा बाद होता था ,,,,,,,, गिनती और फेर कबड्डी ... ४ बजे छुट्टी और फिर से घर.
घर मतलब गाछी और यहाँ वहाँ जाने कहाँ , बस अँधेरा होते होते घर आ जाना वरना कोई मदद नहीं करेगा दादी के सिवा , लालटेन कि रौशनी मे हिंदी किताब जोर जोर से पढ़ना 8 बजे तक ,,,फिर बोरिया बिस्तर समेटे और खाने चल दो ,
गर्मी के महीने में खुले छत पे सोने का आनंद AC में भी नहीं मिलेगा ,और जाड़े का वो सजोट (एक स्पेशल बिस्तर जो पुआल से बनता था ,चौकी को खड़ा किया जाता है ताकि ओस न आये ,फ़ोटो )
इन सारे बातों के बीच बस इतना ध्यान रहे कि क्लास में स्थान हमेशा पहला या दूसरा रहे , नहीं तो सब गड़बड़
बहुत सी बातें लिखनी हैं आगे और लिखूंगा ..........!!

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