सामाजिक न्याय की जो बात आज हमारे कुछ तथाकाथित नेता गण कर रहे हैं शायद अब वो शून्य हो गयी है ।राजनीती जो कभी कुछ गिने चुनी लोगो की बपौती थी आज भी है बस इसका स्वरुप बदल गया है ,पहले अगड़े समुदाय के नेता और कुछ पिछड़े ... आज राजनिती पिछड़ी समुदाय करती है और कुछ अगड़े अपना वर्च्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं । अगर बिहार के परिपेक्ष्य में देखे तो समाजिक न्याय की जो लड़ाई जय प्रकाश नारायण ने जनेऊ तोड़कर शुरू की थी सही में वो लालू और नितीश युग में आकर सम्पन्न हुआ । इस लंबी लड़ाई में अगर किसी ने कुछ खोया यो वो बिहार और बिहारी जनता ।बिहार के अन्दर आवाज पाने की चाहत ने उन्हें सारी दुनिया के सामने मानो मुज़रिम बना दिया । उन्हें आज वहां वो हर समम्मान और इज्जत है जो किसी अगडी जाती की मानी जाती थी , सारी राजनीती पिछडो के बीच केंद्रित हो गयी है।
सामाजिक उथा पुथल में मानो बिहार वीरान हो गया ,जापान के बाद अगर कहीं जनसंख्या घटी है तो वो बिहार है ,चौकिये मत जनाब ,बिलकुल सही फारमाँ रहा हूँ l लोग तो बहुत बढे मगर वहां कोई नई रहता , पढ़ने लिखने की औकात रखने वाले लोग बहार हैं और जो मेहनत मजदूरी करने वाले वो भी । सिर्फ आवाज पाने से पेट नहीं भरता साहब ,आवाज तो मिल गयी मगर इस पापी पेट का क्या ऐसे तो अन्न चाहिये , बर्सो से दबे लोगों को जब पता चला की दुनिया बदल रही तो बदलती हवा भी उन्हें रोक न सकी और वो शायद ही भारत के किसी कोने में न हों।समाज का यह वर्ग अब अपने जगह पे आवाज पाकर भी नयी जगह पे बेगाना ही रहा
बिहार के गावो में सिर्फ बच्चे और बूढे रहते है ,जवान वही जिनके बहुत खेत है और एक डर है कोई हमारा जामीन न जोत ले ,10 गावँ को खिलाने में जीतना चावल आज से 20 साल पहले लगता था आज भी उतना ही लगता है , मतलब हम 1995 से आगे बढे ही नहीं । इन्ही लोगो का प्रेम गाहे बगाहे छठ और होली में भारतीय रेल में उमड़ पड़ता है
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली खेती बस सिमट के रह गयी ।खेत हैं लेकिन मजदूर ही नहीं आखिर पंजाब के मुकाबले की मजदूरी बिहारी किसान कहाँ से कर पाएंगे । मशीनीकरण अभी कोषों दूर है ,हार कर लोगों ने खेती करना ही कम कर दिया है
लेकिन विकास की चमक दूर दूर तक दिख रही है ,बाहर से भेजे पैसे से पक्के मकान हर तरफ दिखेंगे रही सही कसर सरकारी स्कीमो से पूरी हो रही है । छठ और होली के अवसर पे कुछ हलचल हो जाती है और गावँ फिर सो जाता है अगले छठ के इंतज़ार में
शनिवार, 23 मई 2015
दिशा और दशा।
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